Tuesday, 7 August 2012

बनेगी बात नयी सोच बदल कर देखो ,
रहो कहीं भी मगर ख्वाब महल के देखो 
खुलेंगी खिड़कियाँ और आसमान अपना होगा
ज़रा हिम्मत तो करो और घर से निकल कर देखो..

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